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प्राथमिक सात सुख कौन से हैं

  • पहला सुख निरोगी काया
  • दूजा सुख घर में हो माया
  • तीजा सुख कुलवंती नारी
  • चौथा सुख पुत्र हो आज्ञाकारी
  • पंचम सुख स्वदेश में वासा
  • छठवा सुख राज हो पासा
  • सातवा सुख संतोषी जीवन
  • ऐसा हो तो धन्य हो जीवन

1. पहला सुख निरोगी काया

अर्थात हमारे शरीर में किसी भी प्रकार का कोई भी रोग नहीं होना चाहिए कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए कोई कष्ट नहीं होना चाहिए किसी भी प्रकार की पीड़ा से मुक्त शरीर ही पहला सुख है।

2. दूजा सुख घर में हो माया

अर्थात जीवन जीने के लिए, दान पुण्य करने के लिए, और आनंद से जीवन व्यतीत करने के लिए हमारे घर में पर्याप्त माया हो।माया अर्थात धन होना चाहिए।

3. तीजा सुख कुलवंती नारी

सभी प्रकार के सुख सुविधाएं होते हुए रूप सौंदर्य होते हुए विभिन्न प्रकार के विलासिता के साधन होते हुए भी यदि पत्नी अच्छे लक्षणों वाली नहीं है तो जीवन में सुख नहीं हो सकता इसलिए एक पत्नी का सुलक्षणा होना अति आवश्यक है।

4. चौथा सुख पुत्र हो आज्ञाकारी

यदि किसी के पास अपार धन-दौलत हो रूप हो गुण हो ऐश्वर्या हो इज्जत हो लेकिन यदि उसका पुत्र उसकी ही आज्ञा नहीं मानता है तो वे तमाम सुख सुविधाएं उसके लिए नर्क के समान है पुत्र का आज्ञाकारी होना अति आवश्यक है।

5. पंचम सुख स्वदेश में वासा 

मनभावन जगह पर वास सदैव सुखदायी होता है 

6. छठवा सुख राज हो पासा

अर्थात यदि घर में मुख्य पुरुष के सरकारी नौकरी हो या वह राज्य कार्यों से जुड़ा हुआ हो राज्य से उसको आमदनी प्राप्त होती हो और राजकाज आसानी से हो जाते हो।

7. सातवा सुख संतोषी जीवन

जितना प्राप्त उतना पर्याप्त है - इस नियम पर चलने वाला सदैव सुखी रहता है