हिन्दू पंचांग का अंतिम मास फाल्गुन का है। इस महीने की पूनम को फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण इस महीने का नामकरण फाल्गुन रखा गया है। यह मौज मस्ती और उमंग का महिना है जिसमे शिवरात्रि, होली और खाटू श्याम जी का फाल्गुन मेला भरता है। इस महीने से सर्दी कम होती जाती है और गर्मी शुरू होने लगती है।
फाल्गुन मास का महत्व इस कारण है क्योकि -
इस मास में आने वाली विजया एकादशी का व्रत करके श्री राम ने समुन्द्र बाधा को दूर करके लंका प्रस्थान किया था।
फाल्गुन मास महत्व और पड़ने वाले व्रत त्योहार
- फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को माँ लक्ष्मी और माँ सीता की पूजा का विधान है
- आमलकी एकादशी इसी मास की शुक्ल एकादशी को आती है जिसमे विष्णु रूपी आंवले के पेड़ की पूजा करने का विधान है
- शिवरात्रि - फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान् शिव की उपासना का महापर्व महाशिवरात्रि भी मनाई जाती है
- फाल्गुन में ही चन्द्र देवता का जन्म भी हुआ था, अतः इस महीने में चन्द्रमा की भी उपासना होती है
- फाल्गुन में प्रेम और आध्यात्म का पर्व होली भी मनाई जाती है
क्या करे क्या ना करे फाल्गुन महीने में
- फाल्गुन महीने में सबसे ज्यादा श्री कृष्ण की पूजा करनी चाहिए।
- भोजन में अन्न का कम और फलो का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए।
- कपडे रंगीन , आकर्षक पहनने चाहिए और इत्र , सुगंध का प्रयोग भी करे।
इस महीने में नशीली चीज़ों और मांस-मछली के सेवन से परहेज करें।