सर्वप्रथम यम नियम से अपने आंतरिक और बाहरी शरीर की शुद्धि करें विचारों को शुद्ध करें गलत विचारों को ना आने दे उसके बाद, एक आसन का चयन करें इसमें आप आधे घंटे से एक घंटा स्थिरता पूर्वक, सुख पूर्वक बैठ सकें, अगर ऐसा नहीं है तो कुछ आसनों का अभ्यास कर शरीर में स्थिरता और हल्कापन लाएं। सिद्धासन, पद्मासन ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ आसन है। इसके अतिरिक्त सुखासन, गोरक्षासन और भद्रासन में भी आप ध्यान कर सकते है।
सर्वप्रथम आसन लगाकर अपने इष्ट देव को याद करें, और यह धारणा करें कि मैं ध्यान करने जा रहा हूं। तीन बार लंबा गहरा योगिक शवशन करें।
दो से तीन बार भस्त्रिका (तेजी के साथ श्वास छोड़ें और तेजी के साथ साथ श्वास लें, ध्यान रहे स्वास एक ही लय में होना चाहिए कभी धीरे कभी तेज नहीं होना चाहिए। संपूर्ण ताकत से स्वास फेंकना है और लेना है) का अभ्यास करें कम से कम 30 से 50 स्वास और अधिक से अधिक आप अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते है। ऐसा करने से आपके संपूर्ण शरीर में प्राण चेतना और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ जाएगा। अंत वाला स्ट्रोक तेजी से फेंककर रूखे और अंतरमोन हो जाएं। शारीरिक स्थिति को देखें कुछ क्षणों के लिए आपके मन के विचारों की स्थिति सुन्य हो जाएगी उसको महसूस करें, वही ध्यान की स्थिति है।
उसके बाद दो से तीन बार गहरा श्वास लें, और कपालभाति क्रिया का अभ्यास प्रारंभ करें कम से कम 30 से 50 स्वास और अधिक से अधिक अपनी क्षमता के अनुसार करें। लास्ट वाला स्ट्रोक तेजी के साथ फेंके और अंतरमोन होकर, शारीरिक स्थिति को देखते रहे कुछ क्षण के लिए आपके मन के विचार सुन्य हो जाएंगे बस यही ध्यान की स्थिति है। ऐसा करने से आपके शरीर में चेतना के स्तर का एक लेवल और बढ़ जाएगा ध्यान रहे अपनी आंखों को बंद ही रखना है।
अब आपको दो से तीन बार गहरा श्वास लेना और छोड़ना है उसके बाद नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास की 10 आवर्तिया करे। नाड़ी शोधन प्राणायाम पूरे मन मस्तिष्क और आंतरिक अंतरमोन होकर करना है। अपना संपूर्ण ध्यान स्वास पर लगा दे, उस कहानी की तरह। मन को श्वास के साथ ऊपर और श्वास के साथ नीचे और जब आप कुंभक करें तो अपने मन को कुंभक के साथ पकड़ कर रखें विचारों का आगमन बिल्कुल सुण्य हो जाएगा। जैसे-जैसे नाड़ी शोधन का का क्रम बढ़ता जाएगा वैसे-वैसे आपका शरीर, स्वास, मन और मस्तिष्क शांत और ध्यान की स्थिति में पहुंचता चला जाएगा।
नाड़ी शोधन के 10 आवर्ती पूरी करने के बाद बिल्कुल शांत बैठ जाएं और अपने स्वास को ऊपर आते और जाते हुए देखें स्वास को सहज ही चलने दें, उसमें किसी तरीके का व्यवधान ना पढ़ने दे। ऐसा करने से कुछ सेकंड के लिए आप ध्यान की स्थिति में पहुंच जाएंगे। उसके बाद जैसे-जैसे आप अभ्यास बढ़ाते जाएंगे आपके ध्यान का समय बढ़ता चला जाएगा और एक दिन ऐसा आएगा कि आप कई घंटों ध्यान की स्थिति में बैठे रह सकते हैं। लेकिन मन बहुत चंचल होता है इसके लिए निरंतर अनंत काल तक अभ्यास करते रहना है।
विशेष:- पूरे अभ्यास मैं सारा खेल कुंभक का है अर्थात स्वास को रोकने का, स्वास रोकने का अभ्यास एक पिक पॉइंट तक करें जहां तक आपका स्वास रूखे और श्वास लेते या छोड़ते समय आपका स्वास उखडे ना।
यह एक साधारण ध्यान की विधि है जो अष्टांग योग के माध्यम से की जाती है…
सावधानियां:- किसी भी अभ्यास में हृदय के मरीज, हाई बीपी, हाई शुगर, हाइपरटेंशन, चिंता अवसाद की स्थिति में कुंभक का अभ्यास ना करें। किसी भी तरह की शंका या परेशानी होने पर योग्य गुरु से संपर्क अवश्य करें।