हर सुहागिन को करवा चौथ के दिन सफेद या काले रंग के वस्त्र नही पहनने चाहिए | इस दिन इसे पहनना अच्छा नही माना जाता है | इस दिन हो सके तो लाल , गुलाबी वस्त्र पहने और बहुत अच्छे से श्रंगार करे |
करवा चौथ का व्रत करने वाली सभी महिलाओ को भूल कर भी अपने बड़ो का अपमान नही करना चाहिए | उन बड़ो के रूप में आपकी सांस , माँ , नन्द , जेठानी हो सकती है | करवा माँ के आशीर्वाद के साथ अपने बड़ो का भी आशीर्वाद मिलना इस पूजा की सम्पन्नता के लिए जरुरी है |
ध्यान रखे यह व्रत चौथ के दिन सूर्योदय से शुरू होता है और रात्रि में चंद्रमा को अर्ध्य देकर समाप्त होता है | यदि आप व्रत कर रहे है तो बीच में कुछ ना खाए |
* प्रेग्नेंट महिलाये इस व्रत में अपने बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में सोचकर इस व्रत को अगले साल कर सकती है |
करवा चौथ के दिन हर सुहागिन व्रत धारण करती है और माँ गौरी की पूजा अर्चना करती है | अत: इस दिन किसी भी सुहागिन महिला का आपकी बातो से दिल नही दुखना चाहिए |
चौथ के दिन अपने पति से प्रेम से बात करे | यदि उनकी कोई बात आपको बुरी भी लगी हो तो कम से कम चौथ के दिन उस पर कोई प्रतिक्रिया ना दे |
करवा चौथ के दिन कपड़े काटने के लिए कैंची का प्रयोग नही करे | हो सके तो इसे छिपा दे जिससे कि यह चौथ के दिन किसी को भी नही दिखे | सिलाई-कढ़ाई के कार्य इस दिन वर्जित बताये गये है |
करवा चौथ के दिन दूध, दही, चावल या किस सफेद चीज या वस्त्र का दान नही करना चाहिए | इन चीजो का दान इस दिन अशुभ माना जाता है |