हिंदी कैलेंडर में किसी मास के अंतर्गत आने वाली तिथियों की संख्या सोलह होती है। पहली तिथि प्रतिपदा से लेकर अंतिम तिथि पूर्णिमा व अमावस्या सभी तिथियों के स्वामी होते हैं। इन सभी तिथियों का स्वाभाव भी अलग अलग होता है। तिथि के अनुसार उनके स्वामी की उस दिन इष्ट पूजा, प्राणप्रतिष्ठा आदि करना अच्छा माना जाता है। मासिक तिथियां, उनका स्वाभाव तथा उनके स्वामी निम्न प्रकार होते है।
प्रतिपदा तिथि का स्वभाव वृद्धिप्रदायक होता है तथा अग्निदेव इसके स्वामी होते है।
द्वितीया तिथि का स्वभाव शुभदा होता है तथा ब्रह्मा जी इसके स्वामी होते है।
तृतीया तिथि का स्वभाव बलप्रदायक होता है तथा माँ गौरी इसकी स्वामी होते है।
चतुर्थी तिथि का स्वभाव खला होता है तथा गणेश जी इसके स्वामी होते है।
पंचमी तिथि का स्वभाव लक्ष्मीप्रदा होता है तथा नाग देव इसके स्वामी होते है।
षष्ठी तिथि स्वभाव से यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली होती है तथा भगवान कार्तिकेय इसके स्वामी होते है।
सप्तमी तिथि का स्वभाव मित्रवत, मित्रा होता है तथा सूर्यदेव इसके स्वामी होते है।
अष्टमी तिथि का स्वभाव द्वंदवमयी होता है तथा भगवान शिव जी इसके स्वामी होते है।
नवमी तिथि स्वभाव से उग्र अर्थात आक्रामकता देने वाली होती है जिसकी स्वामी माँ दुर्गा होती है।
दशमी तिथि का स्वभाव सौम्य अर्थात शांत होता है तथा यमदेव जी इसके स्वामी होते है।
एकादशी तिथि आनन्दप्रदा अर्थात सुख देने वाली होती है तथा विश्वेदेव जी इसके स्वामी होते है।
द्वादशी तिथि का स्वभाव यशप्रदा होता है तथा विष्णु जी इसके स्वामी होते है।
त्रयोदशी तिथि जयप्रदा अर्थात विजय देने वाली होती है तथा कामदेव इसके स्वामी होते है।
चतुर्दशी तिथि उग्र अर्थात आक्रामकता देने वाली होती है तथा शिव जी इसके स्वामी होते है।
पूर्णिमा तिथि का स्वभाव सौम्या होता है तथा चन्द्र देव जी इसके स्वामी होते है।
अमावस्या तिथि पितर अर्थात (पूर्वजों) को समर्पित होती है।