होलाष्टक होली से आठ दिन पहले की समय अवधि को कहा जाता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्ठमी तिथि से फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक के इन आठ दिनों में शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। यहां कुछ ऐसे ही महत्वपूर्ण कार्य बताये गये है जिन्हे होलाष्टक के समय करने से बचाना चाहिए।
- हिन्दू धर्म के सभी सोलह संस्कार होलाष्टक के समय में करने वर्जित माने जाते है।
- होलाष्टक की समयावधि विवाह करने या विवाह का समय निश्चित करने के लिए भी अच्छी नहीं मानी जाती है। यह एक वैवाहिक जोड़े के जीवन पर अशुभ प्रभाव डाल सकती है।
- नामकरण और मुंडन संस्कार- नामकरण संस्कार जीवन की उन महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक है जो बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने में सहायक होती है। चूँकि, हिंदू धर्म में एक बच्चे के नामकरण का मुहूर्त काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए, होलाष्टक जैसे एक अभेद्य मुहूर्त पर, बच्चे का नामकरण प्रतिकूल प्रभाव दे सकता है।
- निर्माण कार्य- होलाष्टक किसी भी भवन के निर्माणकार्य को प्रारम्भ करने के लिए बहुत ही अशुभ अवसर होता है। व्यावसयिक अथवा व्यक्तिगत उपयोग के लिए, किसी भी भवन के निर्माण की शुरुआत आशानुरूप फल प्रदान नहीं करती है। साथ ही, गृह प्रवेश या भवन निर्माण प्रारम्भ करने के लिए यह एक शुभ समय नहीं होता है।
- होलाष्टक अवधि के समय शुरू किया गया कोई भी व्यवसाय ऋण और हानि को आकर्षित करता है।
- नई नौकरी शुरू करना भी होलाष्टक के समय अच्छा नहीं माना जाता है। इस समय किसी भी नयी जगह कार्यग्रहण करना व्यावसायिक जीवन में तनाव लाता है।
- इन आठ दिनों में, वाहन, सोना या चांदी जैसी कोई भी कीमती वस्तु खरीदना किसी भी प्रकार से एक सही निर्णय नहीं माना जाता है।